DNA न्यूज़। गोंदिया महाराष्ट्र
जिले में एैसे कुछ ही प्राचीन मंदिर व तीर्थस्थल है, जहां पर महाशिवरात्री तथा अन्य आध्यात्मिक पावन पर्व पर देवी-देवताओं के दर्शन किये जाते है। महाशिवरात्री जैसे पावन पर्व पर शिवमंदिर के दर्शन को विशेष महत्व होता है। गोंदिया जिले में एैसा एक पवित्र तीर्थस्थल है जो घने जंगल की प्रकृति की गोद में छिपा हुआ है। ऐतिहासिक-आध्यात्मिक व प्राचीन तीर्थक्षेत्र के नाम से शिव मंदिर पांेगेझरा (बोडुंदा) का नाम लिया जाता है। इस स्थल पर स्वंयभु जलधारा निरंतर बहती रहती है। लेकिन यह जलधारा कहां से आती है इसका रहस्य अभी भी कायम है। इस जलधारा का पानी मिनरल वॉटर से भी शुध्द व मीठा है। मान्यता है कि, निरंतर इस पानी का पीने व स्नान के लिए उपयोग किया जाता है, तो असाधारण रोगों पर नियंत्रण पाया जाता है। प्रति वर्ष महाशिवरात्री के पर्व पर पहले 15 दिन की यात्रा होती थी, लेकिन अब 3 दिन की यात्रा लगती है।
प्राचीन पोंगेझरा शिव मंदिर गोरेगांव तहसील के बोडुंदा ग्राम से कुछ ही दुरी पर टायगर रिजर्व नागझिरा अभ्यारण्य के घने जंगल में बसा हुआ है। प्राचीन पोंगेझरा शिव मंदिर के संदर्भ में बताया जाता है कि, संत मुक्तानंद स्वामी व अयोध्या के जगतगुरू रामजी महाराज ने इस स्थल पर आकर तपस्या की। वहीं बताया जाता है कि, भगवान श्रीराम प्रभु जब जगन्नाथ पुरी से रामटेक की ओर यात्रा कर रहे थे तो पोंगेझरा में एक दिन विश्राम किये थे। इस तरह की धािर्मक मान्यताएं इस स्थल को है। प्राचीन काल के गोंड राजा करणशाह के कुलदेवत भगवान शिव थे। राजा करणशाह ने उस काल में शिव मंदिर का जीर्णाध्दार किया था। इसी परिसर में राजा करणशाह का महल भी था। इसी परिसर में आलाबेदर नामक गांव भी था, जिसका समावेश बाेडुंदा ग्राम में किया गया है। यह तीर्थस्थल बोडुंदा ग्राम के जमीनदार के जमीन पर है, लेकिन अब यह तीर्थस्थल नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प में शामिल किया गया है। इस स्थल पर स्वयंभु जलधारा निरंतर बहती रहती है और इसी जलधारा से सटकर प्राचीन शिव मंिदर है। इस जलधारा पानी कहा से आता है, इसका रहस्य अभी भी बना हुआ है। अंग्रेजो द्वारा प्रकाशित 1908 में भंडारा ग्रेजेट में इस तीर्थस्थल का उल्लेख है। इस तीर्थस्थल पर गोंदिया से सटे छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र के पड़ोसी जिले के श्रध्दालु महाशिवरात्री के पावन पर्व पर पहुँचते है, मान्यता है कि, जाे भी इस स्थल पर आकर भगवान शिव के दर्शन करते है तो उनकी मनोकामना पुर्ण होती है। अभी भी महाशिवरात्री पर छत्तसीगढ़, मध्यप्रदेश राज्य के पड़ोसी जिले से नंदी आते है। तीन दन की यात्रा में हजारों की संख्या में श्रध्दालु यहां पर पहुँचकर स्वयंभु जलधारा का पानी ग्रहण करते है। लेकिन हर किसी के मन में यह सवाल निर्माण हो जाता है कि, आखिरकार इस निरंतर बहनेवाली जलधारा का स्त्रोत कहा पर है, जिसका रहस्य अभी भी बना हुआ है।
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