होली का पर्व आते ही आठ दिन पूर्व से ही गोंदिया जिले में घन माकड़ का खेल शुरू हो जाता था। यह खेल गोंदिया जिले में होली उत्सव पर खेला जाने वाला एक प्रसिद्ध खेल होता था। लेकिन अब यह खेल डिजिटल युग में लुप्त हो गया है। इसी पर्व पर शनिवार 28 फरवरी की रात को इस खेल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस पारंपारिक खेल को देखकर आज की युवा पीढ़ी ने खुब पसंद किया है। घन-माकड़ का यह दृश्य गोरेगांव तहसील के ग्राम हिरडामाली का बताया जा रहा है। जिसमें छोटे बच्चे लकड़ी के घन माकड़ी पर बैठकर खेलते हुए दिखाई दे रहे है।
बता दें की होली का पर्व नजदिक आते ही ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न खेलो का आयोजन गांव के प्रत्येक गलियो मंश किया जाता था। जिसमें प्रमुखता से पारंपारिक खेल घन-माकड़ का होता था। पलाश के आड़ी-तिरछ़ी लकड़ियों को काटकर बीच में एक छेद बनाया जाता था और लकड़े के खंबे पर उसे टांग दिया जाता था और इस घन-माकड़ पर दोनों छोर पर बच्चों को बिठाकर जोर से घुमाया जाता था। यह खेल ग्रामीण क्षेत्र का प्रख्यात खेल होने से हर गली में घन माकड तैयार की जाती थी और रात के दौरान इस खेल को छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक खेला जाता था। बंदर जैसी आवाज आने के लिए घन माकड के छेद में ईमली के बीज (चिचोला) को डाला जाता था। इस दौरान जैसे ही घन माकड़ को घुमाया जाता था तो वहां से बंदर जैसी आवाज निकलती थी। होली दहन के समय इस घन-माकड़ को उखाड़कर होली में दहन कर दिया जाता था। उसके बाद पलाश के फूलों से बनाए गए प्राकृतिक रंग से होली मनाई जाती थी। लेकिन पिछले 20-25 वर्षो से गोंदिया जिले में खेला जाने वाला यह खेल धीरे-धीरे लुप्त होता गया और आज यह खेल पुर्ण रूप से ईतिहास में गुम हो गया है। आज की युवा पीढ़ी इस खेल से अनजान है। लेकिन अचानक इस खेल का वीडियो शनिवार 28 फरवरी की रात को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जिसमें देखा जा रहा है की लकड़ी का घन माकड तैयार कर इस घन माकड पर छोटे बच्चे आनंद ले रहे है। पहले तो यह वीडियो फेक होने की जानकारी दी जा रही थी लेकिन जब इस खेल की पुष्टि की गई तो वीडियो गोरेगांव तहसील के ग्राम हिरडामाली का बताया गया। इस वीडियो को देखते हुए फिर से 20 से 25 वर्ष पूर्व की बचपन की यादे ताजा हो गई।
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