होली पर्व पर वन विभाग सुरक्षा को लेकर अलर्ट -शिकारी तथा लकडे कटाई करने वालों पर रखी जा रही पैनी नजर DNA न्यूज़। गोंदिया महाराष्ट्र

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होली पर्व पर लकडों की होली जलाई जाती है। वहीं होली के दुसरे दिन धुलीवंदन पर्व पर मांसाहारी के शौकीन नॉनवेज का उपयोग भोजन के तौर पर बड़े पैमाने पर करते है। जिसे देखते हुए वन्यजीवों की शिकार तथा लकडो की कटाई करने वाले सक्रीय हो जाते है। ऐसे शिकारी तथा लकडों की कटाई करने वालों पर कड़ी नजर रखने के लिए वन विभाग ने रविवार 1 मार्च से पेट्रोलिंग शुरू कर दी है और गांव-गांव में जाकर वन्यजीवों की शिकार ना करें, लकडों की कटाई न करते हुए पर्यावरणपूरक होली मनाए आदि सुरक्षा को लेकर आव्हान किया जा रहा है। बताया गया है कि वन विभाग की अलग-अलग टीम बनाकर चोविसों घंटे गश्त लगाने के निर्देश भी वरिष्ठ अधिकारियों ने दे दिए है। बता दें कि होली उत्सव पर पारंपारिक पद्धती से सुखे लकडे तथा गोबर के उपलों की होली जलाई जाती है। लेकिन जंगलों से सटे गांवों में कुछ लोग जंगल में जाकर लकडों की कटाई कर होली में लकडों का उपयोग करते है। जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इसी प्रकार धुलीवंदन पर्व पर कुछ मांसाहारी के शौकीन मांस का उपयोग भोजन के तौर पर करते है। जिसे देखते हुए वन्यजीवों की शिकारीयों की टोली सक्रीय हो जाती है। इसके पूर्व शिकार करने के अनेक मामले भी सामने आ चुके है। जंगली जानवरों की व पर्यावरण की विशेष सुरक्षा हेतु वन विभाग द्वारा कड़े नियम लागू किए गए है। गोरेगांव वन विभाग के RFO मनोज गढ़वे तथा विभाग द्वारा बताया गया है कि होली के दौरान शिकार की घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने संवेदनशील इलाकों में चोविसों घंटे गश्त लगाना शुरू कर दी है। वन्यजीवों के सुरक्षा के लिए वनकर्मियों के छोटे-छोटे समूह बनाए गए है। जिसमें वन विभाग के अधिकारियों से लेकर नियमित वनकर्मी व वन मजदूरों का समावेश है। यह टीम अलग-अलग समूह में होकर जंगल क्षेत्रों से सटे गांवों में जाकर वन्यजीव सुरक्षा व जंगलों की सुरक्षा के लिए जनजागृति कर रहे है। जिसमें बताया जाता है कि लकडों की कटाई ना करें, वन्यजीवों की शिकार ना करे और ऐसे कोई संदिग्ध दिखाई पड़ने पर वनविभाग को तत्काल सूचना दें। वन विभाग द्वारा यह भी बताया गया है कि जंगल में शिकारियों का प्रवेश अधिकांश शाम के समय में किया जाता है। वहीं शिकारी विशेष रूप से सुर्यास्त के समय सक्रीय हो जाते है। क्योकि इसी समय शिकारी जंगल में घुसपैठ करने की कोशिश में रहते है, इसलिए उस समय विशेष सावधानी बरतने के साथ कड़ी निगरानी के निर्देश भी टीम को दिए गए है। 

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