मेरी चुनरी में लग गयो दाग री , ऐसे चटक रंग डारो...DNA न्यूज़ नेटवर्क

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होली ऐसा एक उत्सव है जो छोटे से लेकर बुजुर्ग तक बड़े अनोखे अंदाज में पारंपरिक पद्धति से मनाया जाता है। आज के आधुनिक युग में भी पौराणिक कथाओं के साथ होली खेली जाती है। होली पर भजन और गीतों का भी आयोजन किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो होली का माहौल देखने लायक होता है।
मेरी चुनरी में लग गयो दाग री, ऐसे चटक रंग डारो...घर-'बलम पिचकारी जो तूने मुझे मारी...' जैसे गीतों की धुन के साथ जब होली का मौसम आता है, तो पूरे माहौल में रंग, मस्ती और उमंग घुल जाती है। होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों को रंगने और दिलों को जोड़ने वाला उत्सव भी है। पहले यह पर्व आंगन में परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के साथ मिलकर मनाया जाता था। रंग-गुलाल के साथ गुझिया, ठंडाई और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेते हुए लोग एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देते थे, लेकिन समय के साथ होली के जश्न का अंदाज भी बदलने लगा है। हालांकि उत्साह के इस रंगीन माहौल के बीच विशेषज्ञ यह भी याद दिलाते हैं कि होली खेलते समय सावधानी जरूरी है, क्योंकि केमिकल युक्त रंग त्वचा, बाल और आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
 *गोंदिया में पलाश फूलों की खोली जाएगी होली* 
आज गोंदिया जिले के  शहर व ग्रामों में होली खेली जाएगी गोंदिया में योग वेदांत समिति की ओर से बापूजी आश्रम मोक्ष धाम मार्ग पर होली का आयोजन किया गया है जिसमें पलाश के फूल तथा प्राकृतिक रंगों की बौछार होगी इसी के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम की झलक भी देखने को मिलेगी 
ग्रामीण क्षेत्रों में भी आज अनेक ग्रामों में होली का आयोजन किया गया है जिसमें डीजे की धुन फाग के गाने तथा पारंपरिक पद्धति से होली खेली जाएगी।

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