शासन की गलती 17 वर्षों से पीड़ित किसान शासन की योजनाओं से हो रहा वंचित
भरत घासले
DNA । गोंदिया महाराष्ट्र
गलती शासन की और भूगत रहा अल्प भूधारक किसान। पिछले 17 वर्षों से दस्तावेजों पर खेती दर्ज कराने के लिए पीड़ित किसान का शरीर थक गया है। लेकिन दस्तावेजों पर गायब जमीन दर्ज नहीं हो पायी। शासन से परेशान होकर मजबूरन पीड़ित किसान ने आत्महत्या करने का निर्णय लिया है। पीड़ित किसान का नाम पिंडकेपार निवासी कुवरलाल बाबुलाल कटरे बताया गया है। कुवरलाल कटरे का कहना है कि शासन द्वारा 2008 में भूमापन सर्वे किया था। उस समय मेरी खेती 40 आर थी। लेकिन शासन की ही गलती से रेकार्ड पर मात्र 10 आर जमीन दर्ज की गई है।
गोरेगांव तहसील के पिंडकेपार निवासी कुवरलाल बाबुलाल कटरे द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया है कि शासन की ओर से 2008 में भूमापन सर्वे किया गया था। उस समय रिकार्ड पर 40 आर खेती दर्ज थी, जो प्रत्यक्ष रूप में आज भी है। लेकिन दस्तावेजों पर मात्र 10 आर खेती ही दर्ज की गई है। शासन की गलती से 30 आर जमीन दस्तावेजों से गायब हो गई है, जबकि यह खेती प्रत्यक्ष रूप में होकर उस खेती पर अनाज उगाया जा रहा है। दस्तावेजों पर गायब हुई 30 आर जमीन फिर से 7/12 पर दर्ज कराने के लिए तहसील कार्यालय, भूमि अभिलेख तथा संबंधित विभाग में आवेदन कर विनंती की गई। लेकिन इस प्रक्रिया को 17 वर्ष का कालावधी बीत गया। बावजूद किसी भी प्रकार की प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गई और आज भी 30 आर जमीन रेकार्ड में दर्ज नहीं की गई। जिस कारण शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। खेती है, लेकिन कर्ज नहीं मिल रहा है, ना ही बैंकों से कर्ज उपलब्ध हो रहा है। न्याय मांगते-मांगते शरीर थक गया है। अब आखरी रास्ता अपनाया जा रहा है कि 20 मार्च से खेती में भूख हड़ताल शुरू कर शासन को अवगत कराया जाएगा। इसके बावजूद भी न्याय नहीं मिला तो 27 मार्च को खेती में ही आत्मदहन करने की भूमिका अपनानी पड़ेगी। इसके लिए शासन ही जिम्मेदार रहेगा। इस तरह का पत्र जिलाधिकारी, उपविभागीय अधिकारी, जिला अधिक्षक भूमि अभिलेख, तहसीलदार, पुलिस निरीक्षक गोरेगांव, मंडल अधिकारी गोरेगांव, पटवारी कार्यालय मुंडीपार को दिया गया है।
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