किसान कुंवरलाल कटरे: आत्महत्या की चेतावनी से गोरेगांव तहसील प्रशासन जागा - दिए जांच के आदेश, मामला सातबारा दस्तावेजों से जमीन गायब होने का


               भरत घासले
DNA न्यूज़। गोंदिया महाराष्ट्र 
गोरेगांव तहसील के पिंडकेपार निवासी कुवरलाल बाबुलाल कटरे नामक किसान के सातबारा दस्तावेज से 40 आर जमीन में से 30 आर जमीन प्रशासकीय अधिकारियों की लापरवाही से गायब हो गई है। कई बार दस्तावेजों में गायब हुई जमीन दर्ज कराने की मांग तथा पत्र व्यवहार किया जाता है। लेकिन इस ओर अनदेखी ही की गई। जिसे देखते हुए पीड़ित किसान कुवरलाल कटरे ने चेतावनी दी थी कि यदि 26 मार्च तक न्याय नहीं मिला तो मजबूरन आत्महत्या जैसा कदम उठाया जाएगा। किसान की चेतावनी से गोरेगांव तहसील प्रशासन जाग गया और तत्काल ग्राम महसूल अधिकारी मुंडीपार को उपरोक्त मामले की जांच कर अहवाल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। 
बता दें कि पिंडकेपार निवासी अल्पभूधारक पीड़ित किसान कुवरलाल बाबुलाल कटरे द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया है कि गट क्र. 599 में 40 आर जमीन सातबारा के दस्तावेजों पर दर्ज है। जिसके बाद 2008 के पूर्व भूमि अभिलेख विभाग की ओर से जमीन का भूमापन सर्वे किया गया। जिससे गट क्र. 599 बदलकर उस गट को 326 किया गया है। जब 16 जुलाई 2008 को जमीन का सातबारा निकाला गया तो उसमें 40 हजार जमीन के बजाय मात्र 10 आर जमीन ही दर्शायी गई। अर्थात 30 आर जमीन सातबारा के दस्तावेज से गायब हो गई। जिसकी शिकायत तहसील कार्यालय तथा भूमि अभिलेख से कई बार की गई। पत्र व्यवहार कर रिकार्ड दुरूस्ती करने की विनंती की गई, लेकिन इस ओर अनदेखी ही की गई। जिस वजह से शासन द्वारा किसानों को दी जाने वाली योजनाओं का लाभ से वंचित होना पड़ा। खेती पर कर्ज नहीं मिल रहा है, ना ही सरकारी धान खरीदी केंद्रों पर धान बेचा जा रहा है। जिस वजह से बोनस व सरकारी समर्थन मुल्य दर से वंचित रहना पड़ रहा है। 17 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी रिकार्ड में दुरूस्ती नहीं की गई। जिसे देखते हुए पीड़ित किसान कुवरलाल बाबुलाल कटरे ने परेशान होकर तहसीलदार उपविभागीय अधिकारी, पुलिस निरिक्षक तथा संबंधित विभाग के अधिकारियों को शिकायत की कि रिकार्ड दुरूस्ती के लिए 20 मार्च से खेत में ही भूख हड़ताल शुरू कर और इसके बाद भी न्याय नहीं मिला तो 27 मार्च को खेती में ही आत्मदहन करने का कदम उठाया जा सकता है। यदि कोई इस दौरान अप्रीय घटना घटित हो जाती है तो इसके लिए संबंधित प्रशासन व अधिकारी जिम्मेदार रहेगा। इस तरह की चेतावनी शिकायत के माध्यम से की थी। जिसे देखते हुए गोरेगांव तहसील के सहायक जिलाधिकारी तथा तहसीलदार ने तत्काल मामले की प्रत्यक्ष जांच कर अहवाल प्रस्तुत करने के निर्देश ग्राम राजस्व अधिकारी को दिए है। 

0 تعليقات

إرسال تعليق

Post a Comment (0)

أحدث أقدم