RSS मुख्यालय मोर्चे पर रोक, प्रकाश अंबेडकर का ‘जन आक्रोश’ मोर्चा क्यों बना बड़ा मुद्दा? DNA न्यूज़ नेटवर्क

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नागपुर में RSS मुख्यालय तक प्रस्तावित विरोध मार्च को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. प्रकाश अंबेडकर के नेतृत्व में वंचित बहुजन आघाड़ी और भारत मुक्ति मोर्चा ने 23 मार्च को संविधान चौक से RSS मुख्यालय तक मोर्चा निकालने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया. कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रशासन ने इस मार्च को सीमित करने की बात कही है.
दरअसल, नागपुर पुलिस के अनुसार, RSS मुख्यालय तक मार्च निकालने की अनुमति सुरक्षा कारणों से नहीं दी जा सकती है. हालांकि, प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर विरोध प्रदर्शन केवल संविधान चौक तक सीमित रखा जाता है, तो कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी जा सकती है.
किन पार्टियों का मिल रहा है समर्थन?
इस प्रस्तावित मोर्चे को कई राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है, जिससे यह विरोध और व्यापक रूप लेता दिख रहा है. कांग्रेस पार्टी ने भी इस प्रदर्शन को समर्थन दिया है और प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भी शामिल होंगे. इसे संयुक्त विपक्षी प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है.
 *क्या है ‘जन आक्रोश’ रैली का कारण?
वंचित का आरोप है कि भारत एक ऐसा राष्ट्र है जिसका शासन संवैधानिक ढांचे के तहत चलता है. हालांकि, 'एपस्टीन फाइल्स' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सामने आने के कारण, मोदी ने प्रभावी रूप से देश की संप्रभुता को संयुक्त राज्य अमेरिका के पास गिरवी रख दिया है. जहाँ एक ओर दुनिया भर में उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई जिनके नाम एपस्टीन फाइल्स में आए थे, वहीं मोदी के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है. 23 मार्च को RSS मुख्यालय पर होने वाली इस रैली के बाद, RSS को यह फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा कि वे कब तक एक 'ब्लैकमेल हो सकने वाले' मोदी को प्रधानमंत्री के पद पर बनाए रखना चाहते हैं. जनता से आग्रह है कि वे इस रैली में बड़ी संख्या में शामिल हों.

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