वैसे ही गोंदिया जिला आदिवासी बहुल जिले के नाम से पहचाना जाता है। यहां की गोंडी पेंटिंग्स अब धीरे-धीरे पुरे देश में अपना प्रदर्शन कर नई पहचान बना रही है। जम्मु कश्मीर में चल रहे सरस मेले में गोंदिया की गांेड पंेटिंग्स को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। गांेदिया के कलाकारों द्वारा बनाई गई गांेड पंेटिंग ने एक नई पहचान गढ़ दी है। यह मेला जम्मु कश्मीर शासन की ओर से 31 जनवरी से 9 फरवरी तक आयोजित किया गया है। जिसमें गांेदिया जिले के उमेद की एक महिला बचत समुह ने हिस्सा लिया है।
बता दंे की महिलाओं की आर्थिक उन्नती व उन्हंे आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासन ने महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवन्नोनती अभियान 2011 से शुरू किया है। इस अभियान के माध्यम से महिलाओं का समुह तैयार कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कम ब्याज पर कर्ज उपलब्ध किया जाता है। इस कर्ज से महिलाएं विभिन्न व्यवसाय कर आर्थिक उन्नती की ओर बढ़ रही है। गांेदिया जिले में लगभग 17 हजार से अधिक महिला बचत समुह का निर्माण किया गया है जिसमें लाखांे की संख्या में महिलाएं जुडी हुई है। कुछ ऐसे बचत समुह की महिलाएं है जो हस्तकला में निपुन है। अपनी हस्तकला की वस्तुआंे का प्रदर्शन कर गोंदिया जिले की एक नई पहचान बना रहे है। गांेदिया जिला आदिवासी बहुल जिले के नाम से जाना जाता है। यहां की आदिवासी गोंड पंेटिंग ने एक अलग पहचान बना ली है। जम्मु कश्मीर सरकार द्वारा 31 जनवरी से 9 फरवरी तक सरस मेला का आयोजन किया गया है। जिसमें देश भर की महिला बचत समुहांे ने हिस्सा लेकर अपने-अपने राज्यांे की वस्तुआंे का प्रदर्शन कर रही है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र से गोंदिया जिला उमेद की गायत्री बचत समुह की अस्मिता मेन व शालु जीवितकर इन दो महिलाआंे ने अपनी हस्तकला का प्रदर्शन कर गोंदिया की गोंड पेंटिंग तैयार की है। जिसका प्रदर्शन जम्मु कश्मीर में आयोजित सरस मेले में किया जा रहा है। इस गांेड पंेटिंग को इतना पसंद किया जा रहा है की प्रति दिन हजारों रूपए की पेंटिंग बिक रही है। उनका कहना है की यह मेला केवल उत्पादों को एक बड़ा बाजार प्रदान कर रहा है बल्कि हमारी कला व महिलाओं को सशक्त बनाने का एक बेहतरीन मंच है। गांेदिया की आदिवासी गोंड पंेटिंग ने जिले काे एक नई पहचान दी है।
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