मातोश्री पांदन रास्ता: संबंधित ठेकेदार पर विभाग इतना मेहरबान क्यों? जनप्रतिनिधियों की चुप्पी! मंजूरी मिलने के पूर्व ही मातोश्री पांदन रास्ता का निर्माणमामला बोरगांव-सूखपुर सिंचाई विभाग के कैनल पर पगडंडी निर्माण कानियमों की उड़ाई जा रही धज्जियांDNA न्यूज़। गोंदिया

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महाराष्ट्र शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक मातोश्री पांदन रास्ता योजना है यह योजना किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है। लेकिन कुछ ठेकेदारों ने इस योजना को अपना अधिक आमदनी का जरिया बना लिया है। भ्रष्टाचार होने की अनेक शिकायते, चर्चाएं, आरोप  इस योजना को लेकर किए गए हैं। संबंधित कुछ ठेकेदारों ने तो रास्ता निर्माण के लिए सरे आम नियमों की धज्जियां उड़ाई है।  इसके बावजूद भी  किसी भी जनप्रतिनिधियो ने मुंबई मे चल रहे मानसून सत्र के विधानसभा में एक भी मामला उठाया नहीं है। यहां तक कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी चुप्पी साधी है। जो चर्चा का विषय बन गया है। आखिर संबंधित ठेकेदार पर विभाग इतना मेहरबान क्यों? 
गोरेगांव तहसील के बोरगांव-सूखपुर में एक ऐसा मामला सामने आया की सिंचाई विभाग के कैनल पर ही सिंचाई विभाग के मंजूरी के पूर्व ही मातोश्री पांदन रास्ते का निर्माण कर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जब यह बात सामने आई तो विभाग ने इस काम को रोक तो दिया है लेकिन सवाल यह निर्माण होने लग गया है की संबंधित एजेंसी ने इस तरह की जान बुझकर गलती क्यों की? संदेह यह भी निर्माण होने लग गया है की कहीं इसके पीछे विभाग की तो मिलीभगत नहीं है। इस मामले को लेकर क्षेत्रवासियों ने मांग की है की संबंधित निर्माण कार्य की विस्तृत जांच कर एजेंसी तथा संबंधित विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। 
बता दें की मातोश्री खेत पांदन योजना के तहत किसानों को खेतों तक जाने के लिए पगडंडियों का निर्माण किया जा रहा है। यह योजना किसानों के हित के लिए फायदेमंद है लेकिन इस योजना को कुछ ठेकेदारों ने भ्रष्टाचार कर इस योजना को चर्चा में ला दिया है। गोरेगांव तहसील में गुमडोह जलाशय है। इस कैनल से बोरगांव, सूखपुर, नवरगांव, बघोली, चोपनटोली, डोंगरूटोला गांवों की खेती को सिंचाई की जाती है। लेकिन मातोश्री पांदन योजना के तहत बोरगांव-सूखपुर कैनल पर पगडंडी का निर्माण शुरू किया है। जिसका काम लगभग 80 प्रतिशत हो चुका है। लेकिन सिचांई विभाग की मंजूरी लिए बिना ही निर्माण कार्य किया गया है। इस तरह से नियमों की धज्जियां उडाई जा रही है। जिसे देखते हुए क्षेत्रवासियों ने मांग की है की संबंधित एजेंसी व अधिकारियों की जांच कर कार्रवाई की जाए। 
स्वयं को लाभ पहुंचाने, नियमों की अनदेखी
जिस कैनल पर पगडंडी का निर्माण किया जा रहा है उसकी सिंचाई विभाग से अनुमति लेना आवश्यक है। मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण कार्य किया जा सकता है। लेकिन अभी तक मंजूरी का पत्र सिंचाई विभाग की ओर से नहीं दिया गया। इसके बावजुद भी स्वयं को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को तोड़ा गया है। इस निर्माण कार्य के लिए शासन की ओर से 25 लाख रूपए की निधि मंजूर की जाती है और इसी लालच में अधिक फायदा मिलने के उद्देश्य से एंजेंसियां नियमों को तोड़कर निर्माण कार्य कराने में जुट गए है। 
फिलहाल मंजूरी का पत्र नहीं दिया गया
मंजूरी के लिए पत्र प्राप्त हुआ है। कुछ त्रुटियां होने के कारण फिलहाल मंजूरी का पत्र नहीं दिया गया है। 
- राजीव कुरेकार, कार्यकारी अभियंता, गोंदिया लघु सिंचाई विभाग

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