संकट में मातोश्री पांदन योजना , क्या है वजह- मजदूरों की हजेरी की शर्त बन रही मुसीबत भरत घासले। गोंदिया

         भरत घासले। गोंदिया 
महाराष्ट्र सरकार की मातोश्री पांदन रास्ता योजना किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है लेकिन अब यह योजना विभिन्न कारणों को लेकर चर्चा में चल रही है यह योजना के लिए  किसी संकट से कम नहीं।  इस योजना में एक शर्त रखी गई है कि पंजीकृत मनरेगा के मजदूरों से ही अकुशल काम कराकर मजदूरों की हजेरी ऑनलाईन प्रणाली से ली जाए। लेकिन मनरेगा के पंजीकृत मजदूरों की कमी के कारण मातोश्री पांदन रस्ता योजना संकट में आ गई है। पंजीकृत मजदूर  काम करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। मजबूरन एजंसीयों को पगडंडी निर्माण के लिए मशीनरीयों का उपयोग करना पड़ रहा है। जिसे देखते हुए किसानों द्वारा मांग की जा रही है कि,सरकार ने एक ऐसा ठोस कदम उठाना चाहिए ताकि,इस योजना से मजदूरों का भी नुकसान ना हो और एजेंसियों को भी मुसीबतो का सामना करना ना पड़े। यदि इसी तरह की समस्या बनी रही तो किसानों के हित की यह योजना जटील शर्तों के कारण ठप हो जाएगी। 
 *कुछ कामों पर भरपुर मजदूर* 
मातोश्री ग्राम समृद्धी खेत पांदन रस्ता योजना के तहत लगभग 25 लाख रूपए की निधी तक की लागत से पांदन का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें अकुशल काम पंजीकृत मनरेगा के मजदूरों से कराने की शर्त है। इस शर्त के आधार पर निर्माण स्थल पर मनरेगा के मजदूरों की ऑनलाईन हजेरी ली जाती है। बताया जा रहा है कि इस निधी से 6 लाख रूपए की निधी मजदूरों के खाते में जमा की जाएगी। अनेक कामों पर भरपुर मजदूरों की संख्या देखी जा रही है, लेकिन ऐसे भी अनेक काम है, जहां पर मजदूरों का संकट है। लेकिन पगडंडीयों का निर्माण भी करना मानसून के पूर्व जरूरी है। जिसे देखते हुए मजबूरन मशीनरीयों का उपयोग करना पड़ रहा है। लेकिन इसमें भी एक ऐसा अस्थायी हल अपने स्तर पर निकाला गया है कि मजदूरों का भी नुकसान ना हो ,और पांदन रास्ते का काम भी पूर्ण हो इसलिए मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी भी ली जा रही है ताकि मनरेगा के मजदूरों इस योजना का लाभ भी मिल सके। लेकिन कुछ जागरूक नागरिकों द्वारा शिकायत की जाती है कि पांदन रास्तों का काम करते समय मनरेगा के नियमों की अनदेखी की जा रही है। उनकी शिकायतों को भी झूठ नहीं कहा जा सकता।
    *काम है लेकिन मजदूर नहीं* 
शासन की ओर से  विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही है जिसमें से एक मनरेगा योजना है। मनरेगा के माध्यम से परिवार के एक सदस्य को 100 दिन काम देने की गारंटी है । लेकिन मनरेगा के लिए पंजीकृत मजदूर नहीं मिल रहे हैं । यदि मिल भी रहे तो नहीं के बराबर। इतना ही नहीं तो खेती काम के लिए भी मजदूरों की कमी देखी जा रही है जिस वजह से किसान भी परेशान है। इसकी मुख्य वजह यह भी बताई जा रही की जिले में स्थाई रूप से रोजगार के साधन नहीं है जिस कारण अधिकांश मजदूर परिवार रोजगार के लिए अन्य प्रांतों की ओर पलायन कर रहे हैं। गोंदिया जिले में मजदूर नहीं मिलना और मजदूरों का पलायन होना यह यहां के प्रशासन व प्रतिनिधियों की कमजोरी को  दर्शाती है।

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